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May 16, 2018

New born baby care | नवजात शिशु की देखभाल

New born baby care

नवजात शिशु को निरंतर देखभाल की जरूरत होती है, उसको उठाने, सुलाने, नहलाने में सावधानिया रखनी पड़ती है | सर्दी, गर्मी में शिशु की देखभाल कैसे करना है, इसका पता माँ को होना चाहिए | थोड़ी सी असावधानी भी बच्चे को नुक्सान पंहुचा सकती है,  और शिशु को भविष्य में  परेशानी हो सकती है | आईये जानते है नवजात शिशु की देखभाल कैसे की जाए | New born baby care

 

नवजात शिशु की देखभाल |  New born baby care

 

  1.  शिशु को पकड़ना

नवजात शिशु बहुत नाजुक होता है | असावधानी से पकड़ने पर बच्चे को अंदरूनी चोट लग सकती है, बच्चा गिर सकता है | शिशु को एक साफ़ कपडे में लपेटकर रखे | बच्चे को पकड़ने से पहले हाथो को हर बार अच्छे से धोए, जिससे बच्चे को कोई संक्रमण न हो | शिशु की प्रतिरक्षा प्रणाली इतनी मजबूत नहीं होती है , कोई भी संक्रमण जल्दी हो सकता है | शिशु को उठाते समय सर और कमर को सहारा दे |

 

  1. नन्हे शिशु को कैसे नहलाये:

जन्म के बाद शिशु को मुलायम कपडे को गुनगुने पानी में भिगोकर हलके हाथ से पोछना चाहिए | जन्म के एक हफ्ते या 10 दिन में बच्चे को गुनगुने पानी से नहलाना चाहिए | बच्चे को बाथ टब में नहलाये और गुनगुने पानी का इस्तेमाल करे | बच्चे को नहलाते हुए साबुन को कम मात्रा में इस्तेमाल करे | ध्यान रखे शैम्पू और साबुन बच्चे की आँखों में नहीं जाना चाहिए | बच्चे की त्वचा बहुत नाजुक होती है, ज्यादा साबुन लगाने से बच्चे की त्वचा रुखी और खुजली हो सकती है | बच्चे को नहलाते समय माइल्ड साबुन का इस्तेमाल ही करे |

 

  1. त्वचा को साफ़ और सुखा रखे:

नहलाने के बाद शिशु की त्वचा को अच्छे से साफ़ करे | शिशु के जननांग को अच्छे से साफ़ करे | समय पर डायपर बदले, गीला डायपर देर तक पहनाने से बच्चे से त्वचा में खुजली, जलन, होती है | इससे त्वचा पर लाल निशाँन हो जाते है , शिशु चिडचिडा बनता है, और रोता है| दायपर बदलने के बाद त्वचा को अच्छे से साफ़ करे और सूखा रखे | मलत्याग के बाद त्वचा धोने पर कुछ समय बच्चे को डायपर नहीं पहनाये, त्वचा को हवा लगने दे |  जिससे त्वचा में कोई संक्रमण नहीं होगा | त्वचा सूखी होने से कोई संक्रमण नही होता | New born baby care

 

  1. तेल मालिश:

तेल मालिश से बच्चे की हड्डिया और माश्पेशिया मजबूत बनती है | लेकिन, तेल मालिश के लिए तेल का चयन समय सावधानिय रखनी चाहिए | सुगन्धित तेल का इस्तेमाल नहीं करे , इससे बच्चे की त्वचा में एलर्जी हो सकती है | कोई अच्छे बेबी आयल से मालिश करे या सरसों का तेल इस्तेमाल कर सकती है | इससे त्वचा को कोई नुक्सान नहीं होता है , और रोज मालिश करने से हड्डिया मजबूत बनती है | नहलाने से पहले बच्चे की अच्छे से तेल मालिश करे |

 

  1. शिशु को कैसे सुलाए:

वैसे तो नवजात शिशु 12 से 14 घंटे की नींद लेता है | यह नींद बच्चा थोड़े थोड़े अंतराल पर लेता है | वैसे शिशु एक बार में 2 से 3 घंटे की नींद लेता है | 2 या 3 घंटे की नींद के बाद बच्चे को उठाकर स्तन पान कराना चाहिए|  कई बच्चे दिन में सोते है और रात में जागते है , इसके लिए घर में रौशनी कम करे और आवाज नहीं करे | इससे बच्चा सो जायेगा |   शिशु को सुलाते समय ध्यान रखे की थोड़ी देर बाद उसकी सोने की स्तिथि बदलना चाहिए |  एक ही स्तिथि में शिशु को ज्यादा देर तक सुलाने से एक ही तरफ सर पर झुकाव ज्यादा होगा | इससे सर की बनावट बिगड़ जाती है | New born baby care

 

  1. स्तनपान:

अच्छे से स्तन पान करता है तो शिशु 7 से 8 बार डायपर गिले जरुर करेगा | इसमें मलत्याग और मूत्र त्याग दोनों आते है | शिशु के रोने और जागने पर ध्यान रखे उसको समय पर स्तन पान कराए | बच्चा ठीक से खायेगा तो उसका वजन भी ठीक से बढेगा |  अगर आपका बच्चा ठीक से स्तन पान नहीं करता है तो महिला डॉक्टर का परामर्श ले | बच्चे जन्म के शुरूआती दिनों में 24 घंटे में 8 से 12 बार दूध पिलाना चाहिए | बच्चे को हर 3 घंटे में स्तन पान करना चाहिए |  माँ को पौष्टिक भोजन करना चाहिए , ज्यादा तला , मसाले वाला नहीं खाना चाहिए, इसका असर बच्चे पर पड़ता है | शरीर में नहीं बनाये रखे , पर्याप्त मात्रा में पानी पिए |

 

  1. बोतल से दूध पिलाना :

6 महीने तक शिशु को स्तन पान ही कराना चाहिए | वैसे अपनी सुविधा अनुसार आप स्तन पान या बोतल से दूध पिला सकती है | बोतल से दूध पिलाते समय कुछ बातो का ध्यान रखे | नयी बोतल को इस्तेमाल करने से पहले गर्म पानी में अच्छे से उबाले| बच्चे को दूध पिलाने के बाद हर बार गर्म पानी में उबालकर बोतल को इस्तेमाल करना चाहिए |  ठंडा होने पर बोतल में दूध डालकर बच्चे को पिलाए, दूध हल्का गुनगुना होना चाहिए | New born baby care

 

  1.  रोने की वजह :

बिना वजह शिशु नहीं रोते है, उनको कोई समस्या होती है तभी वो रोते है | गलत तरीके से उठाने से , भूख लगने पर कोई अनजान चेहरा देखने पर शिशु रोने लगते है | अगर बच्चा सोते हुए अचानक उठे और रोने लगे तो पहले उसका डायपर चेक करे | डायपर गिला होने पर बच्चा रोता है उसको खुजली होती है | भूख लगने पर भी बच्चा सोते हुए उठ कर रोने लगता है | कभी ठीक से नहीं सो पाता तो थकान की वजह से भी वह रोने लगता है| कभी बच्चा चाहता है की आप उसको गोद में ले, इसलिए वह रोता है|

  1.  गर्भनाल की देखभाल:

शिशु की गर्भनाल जन्म के पहले 3 हफ्ते के अन्दर गिर जाती है | गर्भनाल सूखने पर पीले-हरे, भूरे रंग की होती है | गर्भनाल ठीक होने से पहले उसकी सही देखभाल जरुरी होती है | गर्भनाल को अच्छे से साफ़ करे, मुलायम कपडे से पौछे और हवा लगने दे , अच्छे से सूखने दे | गर्भनाल को हाथ लगाने से पहले हाथ अच्छे से साफ़ कर ले | अगर गर्भनाल में बदबू , मवाद होती है, सुजन या लाल हो जाए तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए | इससे शिशु को संक्रमण होने से पहले ही बचाया जा सकेगा | New born baby care

 

कुछ अन्य बाते जिसको ध्यान रखने की जरूरत है | New born baby care

 

  • शिशु को स्तन पान करने से पहले और बाद में तेल मालिश नहीं करे , क्युकी तेल मालिश बच्चे के शरीर के लिए एक तरह का व्यायाम होता है | शिशु को नहलाने से पहले ही तेल मालिश करे |
  • नहलाने का पानी हल्का गुनगुना होना चाहिए, क्युकी अधिक गर्म पानी से बच्चे की त्वचा को नुक्सान हो सकता है |
  • रात में शिशु अधिक कपडे नहीं पहनाने चाहिये, कपडे इतने हो की बच्चा सर्दी से बच सकते | कपड़ो की अधिक गर्मी से बच्चे को नुक्सान हो सकता है
  • हमेशा बच्चे का रोने का मतलब कुछ गलत नही होता | क्युकी वह रोने के जरिये ही अपनी इच्छाए प्रकट करते है | इसलिए बात करने के लिए भी बच्चा कभी रोता है |
  • भीड़- भाड़ में शिशु जल्दी थक जाते है , उनको कही ले कर जाए तो ध्यान रखे जल्दी घर वापस ले आये | इससे बच्चा थकेगा नहीं और रोयेगा नहीं|
  • अगर आपका शिशु असामान्य व्यवहार करता है, जैसे: स्तन पान कम करना, आवाज और किसी को देखने से कोई भाव प्रकट नहीं करते , अधिक रोना तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए | वैसे कुछ अन्तराल पर नवजात शिशु की डॉक्टरी जांच कराते रहना चाहिए |
  • स्तन पान के अलावा शिशु को साधारण खाना नहीं खिलाये | उसकी पाचन क्रिया इतनी मजबूत नहीं होती, और नहीं दांत होते है |
  •  खेलते समय या गुस्से में शिशु को झटके नहीं दे , इससे दिमाग में खून बह सकता है और बच्चा मर भी सकता है |

 

हमें इस पोस्ट New born baby care के माध्यम से बताया नवजात शिशु की देखभाल कैसे करे |

 

आशा करते है आपको यह पोस्ट New born baby care पसंद आया होगा |

 

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धन्यवाद |

 

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